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Showing posts from August, 2022

Patna High court decision regarding Maithili Education

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दू हजार दू मे पटना हाईकोर्ट द्वारा मैथिली पढ़ाई करेबाक मादे देल गेल डिसीजन एतय पढ़ि सकै छी। देखू कोर्ट केर डिसीजन केर बादो कोना बिहारी सत्ता मैथिली केँ अनठा रहल छै। इ डिसीजन केँ अहाँ पटना हाईकोर्ट केर साइट पर सेहो पढ़ि सकै छी।  PRIMARY EDUCATION IN MAITHILI Dr. Jayakant Mishra v. The State Of Bihar & Ors. Patna High Court 26 Sep, 2002 JUDGEMENT Case Information  Ravi S. Dhavan, C.J:— This petition has been filed as an affirmative action by one Dr. Jayakant Mishra, resident of village and Post Office Gajahara, district Madhubani. He claims that he is the President of All India Maithili Sahitya Samiti, Allahabad and has sufficient interest in the promotion and development of Maithili language, literature and script and the preservation and conservation of the culture of Mithila. He further mentions that he is filing this petition in a representative capacity for the Maithili speaking people of Bihar. He claims that Maithili is spoken in North and Central Bihar which consists...

अलग मिथिला राज किए? (Why separate Mithila State)

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राजन: जखन मिथिला राज आंदोलन आब जोर पकरि रहल छै तए बहुत रास सबाल सेहो उठि रहल छै मिथिला राज केर मादे। मिथिला राज किए चाही? अलग मिथिला राज सँ कि फायदा? देश किए तोरय केर काज कए रहल छी? कि बिहार सँ अलग भेला पर मिथिला राज बिकास करतै या एहिना पाछू रहतै?  कि अहाँ सब देश तौरबै? कि तोय आर बाभनक राज बनेबहो?  आउ हम सब एहि प्रश्न केर उत्तर ताकबाक कोशिश करै छी। मिथिला एतिहासिक रुप सँ राजा मिथि केर राज केँ कहल जाइ छै जकर पुराण मे वर्णित चौहद्दी हिसाब सँ हिमालय, महानदी, गंगा आ गंडकी नदी छै। मिथिला नेपाल मे हिमालय केर तराइ सँ गंगा केर बीचक क्षेत्र केँ कहल जाइ छै। कहल जाइ छै जे नेपालक पशुपतिनाथ आ भारतक बैद्यनाथ धाम केर बीचक क्षेत्र मे मैथिली बाजल जाइ छै अपन अलग अलग रुप मे। मैथिली जगतजननी जानकी जे दुनियॉंक लोक लेल माइ आ मिथिला केर लोक लेल दाइ यानी बहिन केर भाषा मानल जाइ छै। जानकी केर दोसर नाम सीता(हरक सीत सँ निकललाक कारणेँ), मैथिली, वैदेही सब छै।  भारत मे भए रहल मिथिला राज मे बिहार राजक कोशी, दरभंगा, पुर्णियाँ, भागलपुर, तिरहुत आ मुंगेर प्रमंडलक किछ भाग अबै छै आ झारखंड केर द...

चौरचन और तिज एछ मिथिला क' प्रमुख लोकपर्व म' स' एगो।

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राजीव रंजन  : आजुक़ चर्चा विशेष रूप स' मिथिलाक दुगो पावैन के छै एगो य' बहुसंख्यक त' दोसर अल्पसंख्यक। पहिल चौरचन जेकर संधरव मे आधिक लोक क' भुझल ऐच्छ कियकी ई छी बहुसंख्यक आइछ दोसर तीज जे मिथिलाके बहुत भाग म' मनायाल जाइए छै। चौरचन पाबैन भादव मासक शुक्ल पक्ष चतुर्थी (चौठ) तिथि क़' साझ क़' चाउठ चन्द्र के पूजा हाईत अछी, लोक ई पाबैन के चौरचन पबैन सेहो कहैत छै। आही बेर ई पाबैन 30 अगस्त के मनायल जैत। ई पाबैन क़' तयारी भोरे स' सुरु भ' जाइए छै। पाबैन लेल एगो पाबनैती भैर दिन सहल रहै छै। पाबएन के तयारी भोरे स' सुरु भ' जाए छै। घर में तरह तरह के पकवान बनायल जैत छै, मिठका पूरी, तिकड़ी, खीर और हाट स' तरह तरह के फल सेहो अनायाल जाइए छै। साझ परने आंगन में पिथार आ सिंदूर स अरीपन बनायाल जाइए छै, फेर समय एला पर प्रसाद जे चौठि चन्द्र के देखेबक छै, अरिपन पर सजा देल जाई छै। पाबनौती द्वारा हाथ उठाओल जाइए छै और चन्द्र देवतक देखायाल जाय छै। फेर घर के बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा मैर र भंगल जाय छै। मरार बुझु त' अरिपन के बीच में केलाक पात पर   रखल खीर, दालपुरी आदि पक...