चौरचन और तिज एछ मिथिला क' प्रमुख लोकपर्व म' स' एगो।
राजीव रंजन : आजुक़ चर्चा विशेष रूप स' मिथिलाक दुगो पावैन के छै एगो य' बहुसंख्यक त' दोसर अल्पसंख्यक।
पहिल चौरचन जेकर संधरव मे आधिक लोक क' भुझल ऐच्छ कियकी ई छी बहुसंख्यक आइछ दोसर तीज जे मिथिलाके बहुत भाग म' मनायाल जाइए छै।
चौरचन पाबैन
भादव मासक शुक्ल पक्ष चतुर्थी (चौठ) तिथि क़' साझ क़' चाउठ चन्द्र के पूजा हाईत अछी, लोक ई पाबैन के चौरचन पबैन सेहो कहैत छै। आही बेर ई पाबैन 30 अगस्त के मनायल जैत। ई पाबैन क़' तयारी भोरे स' सुरु भ' जाइए छै। पाबैन लेल एगो पाबनैती भैर दिन सहल रहै छै। पाबएन के तयारी भोरे स' सुरु भ' जाए छै। घर में तरह तरह के पकवान बनायल जैत छै, मिठका पूरी, तिकड़ी, खीर और हाट स' तरह तरह के फल सेहो अनायाल जाइए छै। साझ परने आंगन में पिथार आ सिंदूर स अरीपन बनायाल जाइए छै, फेर समय एला पर प्रसाद जे चौठि चन्द्र के देखेबक छै, अरिपन पर सजा देल जाई छै। पाबनौती द्वारा हाथ उठाओल जाइए छै और चन्द्र देवतक देखायाल जाय छै।
फेर घर के बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा मैर र भंगल जाय छै। मरार बुझु त' अरिपन के बीच में केलाक पात पर
रखल खीर, दालपुरी आदि पकवान। ओकरा भांगला के बाद सब गोटे अपन जलपान करैत छाइत।
मरर पर एगो नियम छै जे कोनो कन्या मरर पर भोजन नै क़' सकें छैथ।
हरिताली तीज
गप करै छियै अल्पसंख्यक पाबैन हरिताली तीज क़'। ई पावैन मुख्य रूपे समूचे दक्षिण मिथिला, अर्थात मधेपुरा, समस्तीपुर कटिहार आरो नेपाल के तराई म' कुछ - कुछ जगह मानायल जाइए छै। ई पावैन भादों के शुक्ल पक्ष के त्तृतिया के मनायल जाय छै जेकरा की सुहागन आ' कुमाइर दुन्नू राखै छै।
दु दिन क' ई पावैन मैं एक दिन नहाय खाय आ' दोसर दिन उपास राखल जाय छै उपास के दौरान रात भर जाएग के शिव गौरी अा' गणेश के पूजा संग कीर्तन होय छै।
पहिल विधि
पावैन के विधि स्वरूप बहुतो जगह पर डलिया भरल जाय छै आ बहुते जगह बालू आ' मिट्टी क' गौरी शिव आ गणेश सेहो बनयाल जाय छै। पूजा मैं तरह तरह के पकवान ठेकुआ, पिरकीय, मौसमी फल आ मिठाई स' भरलो जाय छै संगही ओकरा एक टा लाल कपड़ा स' बांधी के पीढीया पर रखलो जाय छै। जेकरा की चौठ क' व्रती क' पति या हुनकर बौवा - बुच्ची क़' द्वारा खोलैलो जाय छै। ओकर बाद व्रती द्वारा प्रसाद खाय क' अपनो व्रत पूर्ण कैल जाय छै।
दोसर विधि
आही म' बालु अा' मिट्टी के गौरी शिव, गनेश के मूर्ति बनाय के पीढ़िया पर पूजल जाय छैक और राईट भर हुनकर कीर्तन करि क' बिहाने बिहाने पौ फटने के बाद ओकरा नदी मैं विसर्जित करि क' व्रत क' पूर्ण करल जाय छै।
राजीव रंजन : प्रो मैथील्स
आशा करि छी जे भी गलती हुये स माफी जतेक जानकारी हमरा पता रहे सेहे के आधार पर लीखलो।
जय जानकी 🙏


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