अलग मिथिला राज किए? (Why separate Mithila State)
राजन: जखन मिथिला राज आंदोलन आब जोर पकरि रहल छै तए बहुत रास सबाल सेहो उठि रहल छै मिथिला राज केर मादे। मिथिला राज किए चाही? अलग मिथिला राज सँ कि फायदा? देश किए तोरय केर काज कए रहल छी? कि बिहार सँ अलग भेला पर मिथिला राज बिकास करतै या एहिना पाछू रहतै? कि अहाँ सब देश तौरबै? कि तोय आर बाभनक राज बनेबहो?
आउ हम सब एहि प्रश्न केर उत्तर ताकबाक कोशिश करै छी। मिथिला एतिहासिक रुप सँ राजा मिथि केर राज केँ कहल जाइ छै जकर पुराण मे वर्णित चौहद्दी हिसाब सँ हिमालय, महानदी, गंगा आ गंडकी नदी छै। मिथिला नेपाल मे हिमालय केर तराइ सँ गंगा केर बीचक क्षेत्र केँ कहल जाइ छै। कहल जाइ छै जे नेपालक पशुपतिनाथ आ भारतक बैद्यनाथ धाम केर बीचक क्षेत्र मे मैथिली बाजल जाइ छै अपन अलग अलग रुप मे। मैथिली जगतजननी जानकी जे दुनियॉंक लोक लेल माइ आ मिथिला केर लोक लेल दाइ यानी बहिन केर भाषा मानल जाइ छै। जानकी केर दोसर नाम सीता(हरक सीत सँ निकललाक कारणेँ), मैथिली, वैदेही सब छै।
भारत मे भए रहल मिथिला राज मे बिहार राजक कोशी, दरभंगा, पुर्णियाँ, भागलपुर, तिरहुत आ मुंगेर प्रमंडलक किछ भाग अबै छै आ झारखंड केर देवघर, साहिबगंज आ गोड्डा क्षेत्र अबै छै। जिलाबार गप्प करी तए मिथिला राज्य मे शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली, पुर्णियाँ, कटिहार, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगुसराय, खगड़िया, अधहा मुंगेर, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, बॉंका, मधेपुरा, अररिया, गोड्डा, साहेबगंज ,अधहा पुर्वी चंपारण आ देवघर अबै छै भाषाक आधार पर। भारतीय लिंग्विस्टिक सर्वे 1902 मे इ सब जिला केर लोक अपना केँ मैथिली भाषी जिला लिखेलकै आ गिर्यसनक लिंग्विस्टिक सर्वे केर मैप मे इ सब जिला केँ मैथिली भाषी क्षेत्र देखाएल गेलै। पुर्वी चंपारण आ पूरा पश्चिमी चंपारण मिथिला राज्य मे संस्कृति आ एतिहासिकता केर आधार पर अबै छै। चंपारण एतिहासिक रुप सँ तिरहुत केर भाग रहलै आ ओतय सामा चकेबा, चौरचन आ झिझिया सनक मिथिला केर सांस्कृतिक पर्व मनाएल जाइ छै। तैं चंपारण केर भाषा भले भोजपुरी आइ काल्हि भए गेल होइ मुदा सांस्कृतिक दृष्टिकोण सँ चंपारण मिथिला केर भाग छै।
मिथिला राज्य केर प्रस्ताव 1912 इस्वी सँ छै। मुदा तत्कालीन राजनीति मे मिथिला केँ बिहार मे मिला देल गेलै। स्वतंत्रता केर बादे सँ बिहार मे मिथिला आर मैथिली केर अस्तित्व पर चोट करब शुरु कए देल गेलै। मैथिली भाषा केँ तोरय लेल बिहारी सत्ता हिन्दी साम्राज्यवादी ताकत केँ संग मे आनि मैथिली केँ दू टा रुप केँ अंगिका, बज्जिका नामकरण करबाए बिहारी मीडिया माध्यमे ओहि रुप बला क्षेत्र मे प्रचारित करय लगलै आ ओहि क्षेत्रक लोकक मोन मे बैसा देलकै जे तोहर भाषा मैथिली नइँ छौ इ अलग भाषा छै। उएह हिन्दी साम्राज्यवादी भोजपुरी केँ उएह किताब मे मल्लिका, कशिका, शहाबादी आ छपरिया मे तोरलकै मुदा बिहारी सत्ता आ बिहारी मीडिया ओकरा प्रमोट नइँ केलकै।
मैथिली भाषा मे प्राथमिक शिक्षा केर गप्प करी तए बेर बेर नोटीफिकेशन केलाक बाद बिहारी सत्ता मैथिली भाषा केँ स्कुल मे नइँ आनलकै। हिन्दी जबरदस्ती मातृभाषा केर रुप मे बिहारी सत्ता मैथिली भाषी केँ पढ़बै छै। मैथिली पढ़ाई पर बेर बेर बिहारी सत्ता सँ गुजारिश कएल गेलै मुदा ओ रटल रटाएल जबाब दैत छै जे अहाँ बच्चा आनु पढ़य लेल हम मैथिली लागू कए देब। दोसर तरीका सँ बिहारी सत्ता कहय चाहि रहल छै कि लोक मैथिली पढ़य नइँ चाहय छै! सरकार सँ सवाल उठै छै कि सरकार कुन आधार पर इ गप्प कहै छै? दोसर एकटा बिदेशी भाषा हिन्दी पढ़बै घरी सरकार लोक सँ राय पुछलकै रहय जे मातृभाषा मैथिली पढ़बै घरी पुछबाक कोशिश कए रहल छ? मैथिली केर पढ़ाई सौंसे मैथिली भाषी क्षेत्र मे अनिबार्य चाही सरकारी स्कूल होइ वा प्राइवेट स्कूल। हिन्दी ऑप्शनल होइ। मैथिली आ अँगरेजी केर अनिवार्य पढ़ाई एहि क्षेत्र मे शिक्षा केर स्तर नीक करतै। मीडियम ऑफ इंस्ट्रकशन सेहो मैथिली हेबाक चाही सब जगह स्कुल सँ ऑफिस तक।
मैथिली मे प्राथमिक शिक्षा देबाक 2003 हाइकोर्ट केर निर्णय केर बादो बिहारी सत्ता साधंश केर बहन्ना बनाए मैथिली शिक्षा केँ अनठाय रहल छै मैथिली सँ दुर्भावना कारणेँ।
बिहार नाम पर बिकास मगध क्षेत्र केर भए रहल छै आ भाषा केर बिकास भोजपुरी केर भए रहल छै। मिथिला क्षेत्र केर नइँ भाषा केर बिकास भए रहल छै नइँ क्षेत्रक। मगध मे शीसा केर पुल आ हमर सीतामढ़ी, सहरसा, पुर्णियाँ चचरीयो पुल लेल झखय छै। पुर्णियाँ मे एशियाक सबसँ पैघ मकइ केर मंडी गुलाबबाग मंडी छै। रेलवे सबटा मकइ मालगाड़ी माध्यमे उगहै छै मुदा पुर्णियाँ केँ एक्कहुटा नीक ट्रेन नइँ दैत छै। बिहारी सत्ता मिथिला केँ मजदूर सप्लाई जोन बना देलकै यै जतय मात्र जनसाधारण आ श्रमिक एक्सप्रेस चलैत छै माल जाल जकाँ कोचल आ ठूसल। घर सँ पलायन भए रहल छै केओ पढ़य लेल केओ दू कौर खाइ लेल। पलायन केर विभीषिका दरभंगा, सहरसा, कटिहार आ मुजफ्फरपुर स्टेशन पर देखाइ छै। मिथिला क्षेत्र केर बाढ़िक समस्या, रोजगार केर समस्या पर सरकार किछ नइँ कए रहल बल्कि बाढ़िक नाओ पर आएल पाइ केँ लुटबाक कोशिश करै छै सरकार। बिहार मे नइँ हमर क्षेत्र, नइँ हमर शिक्षा, सुआस्थ, संस्कृति किछ नइँ बचल यै। तैं हमरा सबकेँ मिथिला राज्य चाही भारतीय संविधान केर अनुसार। भारतीय संविधान केर सबटा प्रावधान मिथिला राज्य पर लागू हेतै तैं बाभन नाम पर राजक गप्प करब प्रोपगैंडा अलावा किछ नइँ छै आ जातिवादी मानसिकता सँ ग्रसित बिहरिया सब एहन सवाल उठबै छै।
मोटामोटी देखल जाइ तए किछ मुख्य कारण संक्षिप्त मे :
बिहार मे उत्तर बिहार यानी मिथिला क्षेत्र केर बिकास मे सतौत बेबहार। बिहारक बिकास केर सबटा साधंश मगध क्षेत्र मे लगाएल जाइ छै।
a) बिहार नाम पर बिकास क्षेत्र मगध केर आ भाषा भोजपुरी केर
b) उत्तर बिहार केर धार सभक बाढ़ि केर समाधान बिहार नइँ करय चाहय छै आ बाढिक नाम पर पाइ केर लुट । जनता मरैत रहय सरकार केँ कोनो मतलब नइँ
सीतामढ़ी केर पुनौराधाम जतय सिया दाइ अवतरित भेलीह जौं ओकरा बिहार सरकार प्रमोट करतिए तए लाखो डॉलर कमा सकैत रहय। ओतुका स्थानीय लोक केँ रोजगार भेटतियै। मुदा बिहार सरकार मिथिला दुश्मनी मे सीतामढ़ी केर पुनौरा केँ अनठा कय मिथिला संगे सतौत बेबहार देखेलकै। दोसरा राजक नेता सब सीता केँ नेपाली कहय छै मुदा बिहारी बौका सत्ता मिथिला दुश्मनी मे एक शब्द नइँ बजै छै।
कुल मिला कय मिथिला केर हैंडीक्राफ्ट, संस्कृति, शिक्षा, सुआस्थ, कानून बेबस्था सब चीज मे बिहारी सत्ता मिथिला संगे भेदभाव करै छै। एतय तक कि बिहार राज गीत मे मिथिला केर जगह नइँ छै।

बिस्तार पुर्वक ऐतेक रास बात बतेबाक लेल धनवाद।
ReplyDeleteअहिना और बिषय सब पर सेहो जानकारी साझा करू।👌👏👍❤️💐
बहुत नीक, विस्तृत आ तर्कसंगत।
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