प्रस्तावित मिथिला प्रांत के गोड्डा जिला के एक टा शक्तिपीठ के | প্রো-মৈথিল্স | "मिथिलाक गप्प मैथिली म"

प्रस्तावित मिथिला प्रांत के गोड्डा जिला के एक टा शक्तिपीठ के ।

Written in south eastern maithili dialect, people of  Bhagalpur, Banka, Munger, Godda, Deoghar, Dumka, speaking this dialect.

राजीव रंजन (2अंक ) : माय योगिनी थान  मंदिर झारखंड में गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड में स्थित छै जे की  गोड्डा केरो जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर के दूरी पर बारकोपा में स्थित छै । माय योगिनी केरो  प्राचीन मंदिर तंत्र साधकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहलो छै आरो एकरो  इतिहास खुब्बे पुराना छै।

ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों  के अनुसार मंदिर द्वापर युग के समय से छै आरो पांडव सिनी ने अपनो बनवास के बहुते समय यहाँ बितैलह सेहो छै एकरो चर्चा महाभारत में भी करलो गेलो छै  उ समय मैं  यह मंदिर  केरो दोसर नाम ‘गुप्त योगिनी’ के नाम से प्रसिद्ध रहे।

धार्मिक ग्रंथो  के कहलो अनुसार महादेव जब अपनो अर्धांगिनी सती के अपमान से ग़ुस्साय क भगवान शिव जब हुनकरो जल्लो शरीर के लेकर तांडव करें लगलो छलै तब्बे भगवान विष्णु ने संसार के विध्वंश से बचावे खातिर आपनो सुदर्शन चक्र से माय सती के जल्लो शरीर  के ढेरी टूकड़ो मैं विभक्त करी देलहै जे क्रम में हुनकार जांघ केरो बाया भाग यही पर गिरलो छलै लेकिन इ सिद्धस्थल को  कोनो कारणों के चलते गुप्त राखल गइल रहै । विद्वान केरो मान्यता अनुसार 51 शक्तिपीठ के वर्णन छै लेकिन योगिनी पुराण केरो अनुसार संख्या बढ़ी के 52 होय  छै 52वॉ शक्तिपीठ यहै छै ई मानलो गेलो छै

जंगलों के बीचों मैं  स्थित ई मंदिर तंत्र साधना केरो मामले में कामख्या के समकक्ष मनलोह जाय छै दोनों मंदिरों के पूजा के एक्के प्रथा रहलो के कारन दोनों मंदिरों के समान मनलोह जाय छै दोनो मंदिर मे तीन तीन दरवाजे छै कामाख्या मंदिर के जेना ही माय योगिनी थान में पिण्ड केरो  पूजा होय छै।

बतैलोह जाय छै की पहलो यहाँ पर नरबली सेहो देल जायत रहै लेकिन अंग्रेजों ने अपनो शासनकाल में एकरा बन्द करवा देने रहै। मंदिर रो सामने मैं एकटा  बट वृक्ष सेहो छै  प्रचलित मान्यताओं केरो अनुसार इ बट वृक्ष पर बैठि क साधक सिनी तपस्या सेहो करै छलै करो सिद्धि प्राप्त करने सेहो रहै।

मंदिर केरो गर्भगृह सेहो आकर्षण के विशेष केंद्र छै माय योगिनी मंदिर केरो बाया ओर से 354 सीढ़ी ऊपरो पर  ऊँचे पहाड़ो पर माय के गर्भगृह सेहो छै गर्भगृह के अंदर जावे के दौरान एक गुफा से होकर गुजरल पड़े छै जेकरा बाहर से देखी के अंदर जाय के हिम्मत केकरो नै होय छै काहेकि पूरा अंधेरा रहै छै आरो आखरी पिपरी के डर सेहो लेकिन माय आपनो भक्त के निराश नै करते सेह द्वारे तोहो सभ प्रवेश करभो माय आपनो बाल बुतरू लैल प्रकाश के व्यवस्था सेहो करी दै छै जबकि एक्को त बल्ब या कुत्रिम रोशनी के इंतजाम नाइ छै 

बाहर सँ गुफा के सांकरो द्वार आरो भीतरो के तरफ निकल्लो नुकीले पथरो के देखी के लोक सिनी अंदर जाय के हिम्मत नै जूटा पावै छै  लेकिन माय रो महिमा कहियो जे मोटो से मोटो आदमी भी आसानी से गुफा के अंदर घुसी के बाहर निकली जाय छै गर्भगृह रो भीतरो मैं  साधु अपनो तपस्या आरो साधना  में लीन रहलो मिलथो । माय योगिनी मंदिर के  ठीक दाय ओर पहाड़ी पर मनोकामना मंदिर सेहो छै कहलो जाय छै योगिनी माय  के दर्शन के बाद मनोकामना मंदिर सेहो जाय के चाही ।


मनोकामना मंदिर पर चर्चा अगले अंक म।


सादर निवेदन करै छियो की पहलो प्रयास मैं जे भी गलती होलैह होतोह   अज्ञानतावश त माफ करभो र  दिशा निर्देश सेहो दियो ।


धन्यवाद, जय जानकी

🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

 প্রো-মৈথিল্স

"मिथिलाक गप्प मैथिली म"


Comments

Popular posts from this blog

चौरचन और तिज एछ मिथिला क' प्रमुख लोकपर्व म' स' एगो।

मैथिली फिल्म "लोटस ब्लूम्स" इंडियन पेनोरमा केर ऑफिसियल फिल्म मे चुनल गेल। गोवा केर नामी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल मे हएत प्रदर्शित

Patna High court decision regarding Maithili Education